मक्का में सनातन के उगते सूरज के बीच सऊदी किंग ने चरमपंथियों को जड़ से मिटाने की खाई कसम !

रमज़ान की शुरुआत होते ही, नमाज़ियों का रोज़ा रखने का सिलसिला शुरु हो चुका है।इस्लाम में रमज़ान की क्या अहमियत है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाइये। नेकियाँ कमाने वाले इस महीने में व्यक्ति अपनी ख्वाहिशों को नियंत्रण में रखकर बुराइयों से बचता है, ताकी अल्लाह की रहमतें उस पर बनी रहें। ना सिर्फ़ सऊदी अरब बल्कि भारत में भी रमज़ान की रौनक़ है। इसी रौनक के बीच सऊदी किंग ने दुनिया को एक नये सऊदी अरब की तस्वीर दिखाई है, जिसमें ना सिर्फ़ चरमपंथियों को जड़ से मिटाने का मिशन शुरु हो चुका है बल्कि मक्का-मदीना में हिंदुओं को प्रॉपर्टी ख़रीदने का मौक़ा भी दिया है। इन सबके बीच पाकिस्तान क्यों जला भुना बैठा है।
इस्लाम की धरती पर विजन 2030 को लेकर चल रहे मुल्क के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान एक नया सऊदी अरब खड़ा कर रहे हैं। आधुनिकता के चश्मे से दुनिया को इस्लाम दिखाने की कोशिश कर रहे है। आज का सऊदी अरब अब पहले जैसा कट्टर नहीं रहा बल्कि दिनों दिन उदारवादी और आधुनिक देश बनता जा रहा है, जिसका ताज़ा उदाहरण है। मक्का-मदीना में हिंदुओं को प्रॉपर्टी ख़रीदने की सहूलियत इस्लाम का सबसे पवित्र शहर, पैगंबर का जन्मस्थान, इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक जहां की हज यात्रा में ग़ैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। उसी जगह पर क्या हिंदू और क्या ईसाई, ग़ैर मुसलमान अपनी ख़ुद की प्रॉपर्टी खड़ी कर सकते हैं।
दरअसल मोहम्मद बिन सलमान का मक़सद है, मुल्क में विदेशी निवेश को बढ़ाना, कैपिटल मार्केट को मजबूत करना और डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ़्तार देना। जिसके लिये सऊदी सरकार ने विदेशियों को इस्लाम के पवित्र शहरों मक्का और मदीना की रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश करने की इजाजत दे दी है। नए नियम के तहत विदेशी निवेशक सऊदी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड उन कंपनियों में इंवेस्ट कर सकेंगे, जो इन दोनों शहरों में स्थित है। गौर करने वाली बात ये है कि व्यक्ति हो या कोई कंपनी सामूहिक रूप से विदेशी निवेशक की किसी प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी 49 परसेंट तक ही होगी। सऊदी के इसी फ़ैसले से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। पाकिस्तानी को प्रिंस सलमान का मॉडरेट इस्लाम' क़बूल है, लेकिन मक्का-मदीना में हिंदू प्रॉपर्टी बना पाए, ये उनसे देखा नहीं जा रहा है। तभी तो रिएक्शन के तौर पर पाकिस्तानियों का कहना है कि इससे इस्लामी दुनिया को नुकसान हो सकता है, सऊदी अरब में मुस्लिमों का ही दबदबा रखना चाहिए, काबा और मक्का-मदीना जैसे शहर हैं, जो मुसलमानों के लिए काफी ज्यादा पाक हैं. यहां पर दूसरे धर्म के लोगों को इजाजत नहीं दिया जानी चाहिए, इससे उनके मजहब का दबदबा बढ़ सकता है।
सत्ता में एंट्री करते ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डे वन से बोल रहे हैं। Talk एंड Terror एक साथ नहीं हो सकता है। आतंकवाद को दुनिया के लिए नासूर बता चुके पीएम मोदी विश्व पटल पर इसके खिलाफ जंग लड़ रहे हैं और उनकी इसी जंग में अब सऊदी अरब भी शामिल हो चुका है…इस्लाम की व्याख्या कर रहे प्रिंस सलमान ने इस बात का ऐलान कर दिया है कि कट्टपंथियों को जड़ से मिटाया जाएगा। खुलकर ये कहा है कि लोगों ने अपने अपने हिसाब से और अपनी समझ के हिसाब से हदीस का विश्लेषण किया है, जिसका फायदा आतंकवादी, चरमपंथी और कट्टरपंथी उठाते हैं, इसलिए इसका दस्तावेजीकरण होना चाहिए।प्रचलन में हदीसों की ज्यादा संख्या होने से इसका आतंकवादियों और चरमपंथियों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है।हदीस को 100 मुतवातिर तक सीमित कर दिया गया है।अल्लाह ने अपने और लोगों के बीच कोई दीवार नहीं खड़ी की। उसने कुरान दिया है और पैगंबर ने उस पर अमल किया।हम इस्लामी चरमपंथ को खत्म करना चाहते हैं और दीगर मजहबों के साथ सहमति में यकीन रखते हैं।
सऊदी प्रिंस ये समझ चुके हैं कि कट्टरता को साथ लेकर मुल्क को विकास की पटरी पर नहीं दौड़ाया जा सकता है, यही कारण है कि चरमपंथियों को जड़ से मिटाने की बात करने लगे हैं और अन्य धर्मों के साथ चलकर एक नये सऊदी अरब की रूपरेखा बुन रहे हैं।