संभल जामा मस्जिद के मौलाना को CJI खन्ना ने लगाई फटकार! "दीवार पुताई" मामले पर जज ने बिना कुछ सुने ही हाईकोर्ट भेजा
दरअसल, जामा मस्जिद के बाहरी हिस्से की रंगाई-पुताई मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि हाई कोर्ट द्वारा रंगोरोगन का आदेश उचित नहीं है। लिहाजा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को हरिहर मंदिर और संभल जैसे स्मारकों या विवादित ढांचे के रखरखाव के लिए कोई धन उपलब्ध कराया नहीं जाता। इस पर संभल की प्रबंध समिति का अवैध कब्जा है।

यूपी का संभल जिला किसी न किसी कारण वश चर्चाओं में बना हुआ है। इस बीच जामा मस्जिद के बाहरी हिस्से की रंगाई-पुताई मामले को लेकर मौलाना सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। जिस पर चीफ जस्टिस खन्ना ने बिना कुछ सुने मौलाना को हाईकोर्ट जाने को कहा। CJI खन्ना ने कहा कि अपनी कंफ्यूजन दूर करने के लिए हाईकोर्ट के पास जाओ और स्थिति को स्पष्ट करो। देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मौलाना की याचिका को खारिज कर दिया।
क्या है संभल जामा मस्जिद की रंगाई पुताई का मामला ?
दरअसल, जामा मस्जिद के बाहरी हिस्से की रंगाई-पुताई मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका द्वारा आपत्ति जताई गई थी। इसमें कहा गया था कि "हाई कोर्ट द्वारा रंगोरोगन का आदेश उचित नहीं है। लिहाजा हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए।" हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि "भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को हरि हर मंदिर और संभल जैसे स्मारकों या विवादित ढांचे के रखरखाव के लिए कोई धन उपलब्ध कराया नहीं जाता। इस पर संभल की प्रबंध समिति का अवैध कब्जा है।"
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में क्या कुछ कहा
बीते 12 मार्च को हाईकोर्ट ने संभल की जामा मस्जिद की बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को आदेश दिया था। इसमें बाहरी हिस्से पर सफेदी कराने की बात कही गई थी। इसके खर्चे को मस्जिद समिति को वहन करने को कहा गया था। लेकिन इस पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई थी। याचिका दायर करने वाले पक्ष के वकील ने कहा था कि हाई कोर्ट का यह आदेश भ्रमित करने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने मौलाना को क्या जवाब दिया
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में कोई भी हस्तक्षेप करने के लिए या रोक लगाने के लिए इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस कोर्ट खन्ना ने उस आदेश को भी खारिज कर दिया। जिसमें हाईकोर्ट ने ASI को मस्जिद समिति से खर्च वसूलने की अनुमति देकर कानूनी त्रुटि दी है।