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JDU नेता केसी त्यागी का दावा, क्षेत्रीय दलों को खत्म करना चाहती है कांग्रेस

पूर्व राज्यसभा सांसद और जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने सोमवार को आईएएनएस से खास बातचीत में इंडी अलायंस की स्थिति और सोशल मीडिया पर सख्त कानून बनाने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किया।
JDU नेता केसी त्यागी का दावा,  क्षेत्रीय दलों को खत्म करना चाहती है कांग्रेस
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों में जिस तरह से बीजेपी की प्रचंड जीत और एक दशक से दिल्ली की सत्ता में राज करने वाली आम आदमी पार्टी की बुरी हार हुई है। उसने सभी को चौंकाया है, इसको लेकर अब देश के अलग-अलग हिस्सों से सियासी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही है। इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद और जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने सोमवार को आईएएनएस से खास बातचीत में इंडी अलायंस की स्थिति और सोशल मीडिया पर सख्त कानून बनाने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किया।
 

इंडी गठबंधन खत्म 

इंडी अलायंस की स्थिति और उसे खत्म करने को लेकर उठ रही मांग के सवाल किए जाने पर केसी त्यागी ने कहा, "गठबंधन पहले ही समाप्त हो चुका है। जब नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू ने अपने आप को गठबंधन से अलग कर लिया, तो हमारी भविष्यवाणी सही साबित हुई। कांग्रेस पार्टी हमेशा से क्षेत्रीय दलों को समाप्त करने की कोशिश करती रही है। उनके द्वारा खोजा गया जन आधार अब क्षेत्रीय दलों द्वारा छीना जा चुका है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद थे और उन्होंने किसी भी पार्टी के साथ सीट शेयर करना जरूरी नहीं समझा। अब, वह क्षेत्रीय दलों को हराकर खुद को विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं।"


उमर अब्दुल्ला ने भी दी थी प्रतिक्रिया 

केसी त्यागी ने कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उमर ने कहा था कि हरियाणा में कांग्रेस को आम आदमी पार्टी ने निपटाया और दिल्ली में आप को कांग्रेस ने निपटाया। इस पर केसी त्यागी ने कहा कि इस समय कांग्रेस पार्टी और क्षेत्रीय दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। भाजपा उनके बीच नहीं है, लेकिन यह लड़ाई समय के साथ और तेज हो सकती है। संभव है कि बिहार में कांग्रेस और आरजेडी अलग-अलग चुनाव लड़े, क्योंकि दोनों दलों के बीच अस्तित्व की लड़ाई छिड़ी हुई है। इसके अलावा, केसी त्यागी ने सोशल मीडिया पर सख्त कानून की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम प्रेस की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, हम आपातकाल के दौर से गुजरे हैं, लेकिन जिस तरह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसमें चरित्र हनन और अफवाहों का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। सभी दलों को मिलकर एक गंभीर विचार-विमर्श करना चाहिए और इसके लिए कोई आचार संहिता तय करनी चाहिए।


उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 48 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, आम आदमी पार्टी महज 22 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस एक बार फिर अपना खाता खोलने में नाकाम रही।
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