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मोदी सरकार के खिलाफ बोलना फेसबुक मालिक को पड़ा भारी, संसदीय समिति META को भेजेगी मानहानि का नोटिस

भारत की संसदीय समिति META के CEO मार्क जुकरबर्ग को मानहानि का समन भेजेगी। यह समन META के CEO मार्क जुकरबर्ग के उस बयान को लेकर भेजा जाएगा, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोविड के बाद भारत में मोदी सरकार हार गई थी। जिसके बाद भारत सरकार ने उनसे माफी की मांग की है और आंक़ड़ों के साथ जुकरबर्ग को आईना दिखाया है
मोदी सरकार के खिलाफ बोलना फेसबुक मालिक को पड़ा भारी, संसदीय समिति META को भेजेगी मानहानि का नोटिस
कांग्रेस से लेकर सपा। ममता से लेकर लालू तक मोदी सरकार के गिरने की भविष्यवाणी कर बार बार शोर मचाकर माहौल बनाती है।और हर बार मुंह की खाती है। इस बार विपक्ष के साथ ताल में ताल मिलाते नजर आए फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग। जिन्होंने आव देखा ना ताव और छूटते ही मोदी सरकार के गिरने का दावा ठोक दिया।जैसे ही मार्क जुकरबर्ग के मुंह से ये बयान निकले। मोदी के सिपाही मुंहतोड़ जवाब देने के लिए मैदान में कूद आए। दरअसल केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मार्क जुकरबर्ग के बयान पर तगड़ा पलटवार किया। और उनके दावे को गलत बताते हुए आईना दिखाते हुए साफ साफ कहा-"दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, भारत ने 2024 के चुनावों को 64 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ आयोजित किया। भारत के लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए पर भरोसा जताया. जुकरबर्ग का दावा है कि 2024 के चुनावों में भारत सहित अधिकांश मौजूदा सरकारें कोविड के बाद हार गईं, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है"



अश्विनी वैष्णव जुकरबर्ग को मुंहतोड़ जवाब देने से यहीं पीछे नहीं हटे। इसके बाद उन्होंने आगे आईना दिखाते हुए साफ शब्दों में कहा "80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त भोजन, 2.2 अरब मुफ्त वैक्सीन और कोविड के दौरान दुनिया भर के देशों को सहायता देने से लेकर भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में नेतृत्व करने तक पीएम मोदी की निर्णायक तीसरी बार की जीत अच्छे शासन और जनता के विश्वास का प्रमाण है। जुकरबर्ग की ओर से दी गई ये गलत सूचना निराशाजनक है। आइए तथ्यों और विश्वसनीयता को बनाए रखें"

अब क्यों अश्विनी वैष्णव जुकरबर्ग पर इस कदर भड़के की आंकड़ों के साथ उन्हें दिखाना पड़ा की मोदी सरकार कितनी पावरफुल है। दरअसल फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने एक पॉडकास्ट में कोविड की बीमारी के बाद सरकार में विश्वास की कमी पर चर्चा कर हुए कहा कि "साल 2024 दुनिया भर में एक बड़ा चुनावी साल था और भारत समेत इन सभी देशों में चुनाव थे। लगभग सभी सत्ताधारी चुनाव हार गए। पूरे साल में किसी न किसी तरह की वैश्विक घटना हुई। चाहे वो महंगाई के कारण हो या कोविड से निपटने के लिए आर्थिक नीतियों के कारण या सरकारों द्वारा कोविड से निपटने के तरीके के कारण, ऐसा लगता है कि इसका असर ग्लोबल था"

तो मार्क जुकरबर्ग का कहना है कि 2024 में चुनाव थे तो सभी सत्ताधारी चुनाव हार गए। क्योंकि पूरे साल कोविड समेत कई ऐसी वैश्विक घटनाएं घटी। जिसका लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा। और सरकार के प्रति लोगों की उदासीनता भी बढ़ी है। यही वजह है कि ज्यादातर सरकारें गिर गई। हालांकि अश्विणी वैष्णव ने जुकरबर्ग की आंख खोलते हुए बता दिया कि कोविड के बाद मोदी सरकार ने जिस तेजी के साथ काम किया है। सरकार जिस हिसाब से लोगों के इलाज को लेकर अलर्ट रही है। उससे सरकार के प्रति लोगों की विश्वनीयता बढ़ी है। यही वजह है कि मोदी तीसरा बार सत्ता में आए। और NDA की सरकार मजूबत रही। खैर अपने इस बयान पर जुकरबर्ग भारत में बुरी तरह फंस गए हैं। अब खबर ये आ रही है कि। भारत की संसदीय समिति META को मानहानि का समन भेजेगी। यह समन जुकरबर्ग को मोदी सरकार के गिरने की बात कहने पर भेजा जाएगा। निशिकांत दुबे ने कहा- META को गलत जानकारी फैलाने के लिए माफी मांगनी चाहिए

जुकरबर्ग ने मोदी के खिलाफ माहौल बनाकर पूरी दुनिया में गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिश की। ठीक वैसे ही जैसे इंडिया गठबंधन के लोग झूठ फैलाकर मोदी की कुर्सी हिलाने की साजिश रचते हैं। लेकिन मोदी सरकार ऐसी विरोधियों को जवाब देने में देरी नहीं करते हैं। यही वजह है कि जुकरबर्ग के खिलाफ भी तेजी से एक्शन लिया गया है । 

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