अगर भारत न होता, तो आज चांद तक नहीं पहुंच पाती दुनिया!
चांद तक पहुंचने की होड़ में अमेरिका, रूस, चीन और भारत शामिल हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर भारत न होता, तो शायद कोई भी देश चांद पर नहीं पहुंच पाता? भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने दशमलव की खोज की, जिसने सटीक गणनाओं को संभव बनाया। दशमलव के बिना रॉकेट साइंस, स्पेस नेविगेशन, समय गणना और इमेज प्रोसेसिंग असंभव थी।

चांद पर पहुंचने की होड़ में अमेरिका, रूस, चीन और भारत जैसे बड़े देश शामिल हैं। इनमें अमेरिका, रूस और चीन पहले ही चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग कर चुके थे, जबकि भारत चौथा देश बना जिसने यह कारनामा किया। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर भारत न होता तो शायद दुनिया कभी चांद तक नहीं पहुंच पाती? यह सुनने में अटपटा जरूर लग सकता है, लेकिन यह एक ऐसा सच है जिसे खुद विज्ञान भी स्वीकार करता है।
दरअसल, एक समय ऐसा था जब दुनिया को न चांद तक पहुंचने की तकनीक पता थी और न ही वहां की दूरी और गणना का सही आकलन किया जा सकता था। लेकिन भारत के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने जब दशमलव प्रणाली की खोज की, तो इसने अंतरिक्ष विज्ञान की नींव रख दी। दशमलव ही वह खोज थी जिसने दुनिया के कई देशों के लिए चांद पर पहुंचने का रास्ता बनाया। आइए, समझते हैं कि दशमलव प्रणाली अंतरिक्ष विज्ञान के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है।
अंतरिक्ष विज्ञान में दशमलव का महत्व
1. सटीक गणना में मददगार
अंतरिक्ष अभियानों की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सटीक गणना की होती है। किसी भी मिशन में गलती की गुंजाइश नहीं होती, क्योंकि एक मामूली चूक भी मिशन को असफल बना सकती है। ऑर्बिट की स्थिति, उपग्रहों की गति, रॉकेट में ईंधन की मात्रा, और लैंडिंग साइट की गणना—इन सभी में दशमलव प्रणाली का उपयोग किया जाता है। यदि चंद्र मिशन में एक भी दशमलव की गलती हो जाए, तो पूरा अभियान विफल हो सकता है।
2. नेविगेशन सिस्टम की रीढ़
किसी भी अंतरिक्ष यान की सटीक ऑर्बिट निर्धारित करने के लिए न्यूटन और कैपलर के नियमों का पालन किया जाता है। ये गणनाएँ दशमलव के बिना संभव नहीं हैं। यदि गणना में थोड़ा सा भी अंतर आ जाए, तो अंतरिक्ष यान अपने लक्ष्य से भटक सकता है, जिससे पूरा मिशन खतरे में पड़ सकता है।
3. समय की गणना
अंतरिक्ष में समय की गणना नैनो सेकेंड (0.000000001 सेकंड) में होती है। इस स्तर की सटीक गणना दशमलव प्रणाली के बिना असंभव है। न केवल समय की गणना बल्कि पृथ्वी और अंतरिक्ष यान के बीच ट्रांसमिशन डेटा को सही तरीके से भेजने और प्राप्त करने के लिए भी दशमलव प्रणाली का सहारा लिया जाता है।
4. रॉकेट साइंस और फ्यूल कैलकुलेशन
रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सही समय का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी रॉकेट को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचना है, तो उसकी लॉन्चिंग ऐसे समय पर करनी होगी जब ISS धरती के सबसे करीब हो। इस सटीक गणना के लिए दशमलव प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसी प्रणाली के आधार पर फ्यूल की गणना भी होती है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मिशन पूरा होने तक ईंधन की सही मात्रा बनी रहे।
5. डेटा प्रोसेसिंग और इमेज एनालिसिस
अंतरिक्ष टेलीस्कोप और प्रोब द्वारा भेजी गई इमेज और डेटा को प्रोसेस करने में भी दशमलव प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैज्ञानिक माइक्रोमीटर और मिलीमीटर स्तर पर डेटा की जांच करते हैं, जिससे किसी भी नई खोज या निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है।
महान गणितज्ञ आर्यभट्ट जिसने बदल दी दुनिया
आर्यभट्ट भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे, जिन्होंने दशमलव प्रणाली की खोज की और इसे व्यापक रूप से उपयोग में लाया। उन्होंने संख्याओं को लिखने का एक व्यवस्थित तरीका विकसित किया, जिससे 1, 10, 100, 1000 जैसी संख्याओं को आसानी से दर्शाया जा सका। इसके अलावा, उन्होंने पृथ्वी की परिधि और चंद्रमा की गति से जुड़े कई महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत भी विकसित किए।
आर्यभट्ट के अलावा, ब्रह्मगुप्त, आचार्य रामानुजन और शकुंतला देवी जैसे महान गणितज्ञों ने भी गणित के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया, जो आज भी अंतरिक्ष विज्ञान और गणना में मददगार साबित हो रहे हैं।
दशमलव के बिना संभव था चांद पर पहुंचना?
अगर दशमलव प्रणाली की खोज नहीं होती, तो स्पेस साइंस आज जहां है, वहां कभी नहीं पहुंच पाती। दशमलव प्रणाली के बिना रॉकेट साइंस और स्पेस मिशन की सटीक गणना संभव नहीं होती। चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों की सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। नेविगेशन और ट्रांसमिशन में भारी दिक्कतें आतीं।
संक्षेप में कहें तो, अंतरिक्ष विज्ञान की उन्नति में भारत और भारतीय गणितज्ञों का योगदान अतुलनीय है। यही कारण है कि जब भी दुनिया चंद्रमा की ओर देखती है, तो उसे भारतीय गणितज्ञों की दी हुई दशमलव प्रणाली का एहसास जरूर होता है।
आज भले ही अमेरिका, रूस, चीन और भारत चांद पर पहुंच चुके हैं, लेकिन इसकी आधारशिला भारत के महान गणितज्ञों ने हजारों साल पहले ही रख दी थी। दशमलव प्रणाली के बिना अंतरिक्ष विज्ञान अधूरा है, और इसकी खोज किए बिना दुनिया शायद ही चांद पर पहुंच पाती। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर भारत न होता, तो शायद दुनिया चांद पर कभी नहीं पहुंच पाती!