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रेलवे का नया नियम: ट्रेन की देरी पर कितने घंटे बाद मिलेगा रिफंड?

Indian Railway: रेलवे ने इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए कुछ नियम बनाए हैं, जिनके तहत यात्रियों को रिफंड देने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। रिफंड के नियमों को समझने से पहले, यह जानना जरूरी है कि कितने घंटे ट्रेन लेट होने पर यात्री को रिफंड मिल सकता है और इसके लिए क्या शर्तें लागू होती हैं।
रेलवे का नया नियम: ट्रेन की देरी पर कितने घंटे बाद मिलेगा रिफंड?
Photo by:  Google

Indian Railway: भारत में भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन सेवा है, लेकिन कभी-कभी ट्रेन के लेट होने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे यात्रियों को असुविधा होती है। ऐसे में, रेलवे ने इस तरह की समस्याओं से निपटने के लिए कुछ नियम बनाए हैं, जिनके तहत यात्रियों को रिफंड देने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। रिफंड के नियमों को समझने से पहले, यह जानना जरूरी है कि कितने घंटे ट्रेन लेट होने पर यात्री को रिफंड मिल सकता है और इसके लिए क्या शर्तें लागू होती हैं।

रेलवे का रिफंड नियम: ट्रेन लेट होने पर रिफंड

भारतीय रेलवे के रिफंड नियम के अनुसार, यदि ट्रेन निर्धारित समय से तीन घंटे या उससे अधिक समय तक लेट होती है, तो यात्री को रिफंड मिलने का अधिकार होता है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें और प्रक्रियाएं हैं, जो ध्यान में रखनी होती हैं:

तीन घंटे या उससे अधिक की देरी: यदि ट्रेन का निर्धारित आगमन समय तीन घंटे या उससे अधिक के लिए विलंबित होता है, तो यात्री को उसकी यात्रा की कीमत का कुछ हिस्सा रिफंड के रूप में मिल सकता है।

टिकट रिफंड प्रक्रिया: रिफंड के लिए, यात्री को अपनी टिकट रद्द करनी होगी। यदि टिकट ऑन-लाइन बुक किया गया है, तो ऑनलाइन रिफंड की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। यदि टिकट स्टेशन पर बुक किया गया है, तो यात्रियों को रेलवे काउंटर पर जाकर रिफंड की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

मौजूदा नियम: भारतीय रेलवे के नियमों के तहत, यह रिफंड विशेष रूप से मल्टी-पलट (Multiple halt) ट्रेन सेवाओं के लिए लागू होता है, जैसे शताब्दी, राजधानी, एक्सप्रेस, आदि, जो नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करती हैं।

रिफंड का प्रतिशत: रिफंड का प्रतिशत आम तौर पर टिकट की कीमत का एक निश्चित हिस्सा होता है, जो रेलवे द्वारा निर्धारित होता है। यह रेलवे द्वारा तय किए गए नियमों के आधार पर बदल सकता है।

विशेष परिस्थितियों में रिफंड की स्थिति

रेलवे के रिफंड नियमों में कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए भी प्रावधान हैं:

यात्रा में रुकावट: अगर ट्रेन किसी प्राकृतिक आपदा, हिंसा, अथवा तकनीकी कारणों से रुक जाती है और तय समय से काफी अधिक देर हो जाती है, तो यात्रियों को पूरी राशि का रिफंड मिल सकता है।

ट्रेन कैंसिलेशन: यदि ट्रेन को पूरी तरह से कैंसिल कर दिया जाता है, तो सभी यात्रियों को पूरा रिफंड मिलता है, चाहे उनकी ट्रेन के लेट होने का समय कितना भी हो।

क्लास परिवर्तन: यदि किसी कारणवश ट्रेन में बोगी की क्लास (जैसे एसी क्लास से स्लीपर क्लास) बदल दी जाती है, तो यात्री को अपनी यात्रा के लिए उपयुक्त रिफंड मिल सकता है, यदि उन्हें सुविधा में कोई कमी महसूस हो।

कैसे प्राप्त करें रिफंड?

रिफंड प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं:

ऑनलाइन टिकट: यदि आपने ट्रेन टिकट ऑनलाइन बुक किया है, तो आप अपनी बुकिंग के पोर्टल पर जाकर रिफंड की प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं। कई बार यात्रियों को ऑनलाइन ही रिफंड मिल जाता है।

स्टेशन काउंटर: यदि आपने स्टेशन पर टिकट खरीदी है, तो आपको रिफंड प्राप्त करने के लिए स्टेशन काउंटर पर जाना होगा। आपको अपने टिकट और पहचान पत्र के साथ काउंटर पर रिफंड आवेदन करना होगा।

कंप्लेंट प्रोसिजर: यदि आपको रिफंड में कोई समस्या हो रही है, तो आप रेलवे की शिकायत निवारण प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं। आप रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके या वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

रेलवे के रिफंड नियम यात्रियों के अधिकारों की रक्षा करते हैं, ताकि वे ट्रेन में होने वाली असुविधाओं से राहत पा सकें। हालांकि, ध्यान रखना जरूरी है कि रिफंड प्राप्त करने के लिए कुछ शर्तों और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। अगर ट्रेन तीन घंटे या उससे अधिक लेट होती है, तो यात्रियों को रिफंड का हक होता है। इसके अलावा, अगर ट्रेन पूरी तरह से कैंसिल हो जाती है, तो यात्रियों को पूरी राशि का रिफंड मिलता है। रेलवे ने यात्रियों को ध्यान में रखते हुए यह सिस्टम बनाया है, ताकि उनका अनुभव बेहतर हो सके 

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