गरीब कारीगरों को मिलेगी 500 रुपये प्रतिदिन की स्टाइपेंड के साथ स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, सरकार ने किया ऐलान

PM Vishwakarma Yojana: सरकार की अलग-अलग योजनाओं का लाभ देश के विभिन्न लोगों को मिलता है। सरकार की ज्यादातर योजनाएँ देश के गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए होती हैं। कुछ योजनाओं में सरकार लोगों को आर्थिक लाभ देती हैं, तो वहीं कुछ योजनाएँ ऐसी होती हैं, जिनमें भारत सरकार की ओर से आर्थिक लाभ के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाती है, जिससे लोगों को रोजगार प्राप्त करने में आसानी होती है। ऐसी ही एक योजना है प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना। आइए जानते हैं इस योजना के बारे में।
पीएम विश्वकर्मा योजना में मिलते हैं ये लाभ
भारत सरकार की ओर से चलाई जा रही प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में छोटे रोजगार से जुड़े लोगों को लाभ प्रदान किया जाता है। इस योजना में जुड़ने वाले लाभार्थियों को सरकार की ओर से कुछ दिनों तक ट्रेनिंग दी जाती है, और जब तक यह ट्रेनिंग चलती है, तब तक उन्हें ₹500 प्रतिदिन के हिसाब से स्टाइपेंड (वेतन) दिया जाता है।ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सरकार की ओर से लाभार्थी को टूलकिट खरीदने के लिए एकमुश्त ₹15,000 दिए जाते हैं। इसके अलावा, इस योजना में ₹1 लाख तक का लोन भी दिया जाता है, जो सस्ती ब्याज दर पर और बिना किसी गारंटी के मिलता है।यह लोन चुकाने के बाद, लाभार्थी को ₹2 लाख तक का अतिरिक्त लोन भी प्राप्त किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लिए पात्रता
इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए कुछ पात्रताएँ हैं, जो निम्नलिखित हैं:
पारंपरिक कारीगर – जिनके पास किसी पारंपरिक शिल्प व्यवसाय से संबंधित कौशल हो, जैसे कि बढ़ई, लोहार, सुनार, मूर्तिकार, बुनकर, आदि।
आवेदनकर्ता का उम्र सीमा – आवेदनकर्ता की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
आवेदनकर्ता का कार्य अनुभव – शिल्पकारों या कारीगरों को कम से कम 5 वर्षों का अनुभव होना चाहिए, जो उनके पारंपरिक व्यवसाय से संबंधित हो।
स्वतंत्र व्यवसाय करने वाला व्यक्ति – यह योजना मुख्य रूप से ऐसे कारीगरों के लिए है जो खुद का काम करते हैं और वे किसी संगठन या सरकारी सहायता से जुड़े नहीं हैं।
स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले – यह योजना छोटे शहरों, गाँवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में काम करने वाले कारीगरों के लिए अधिक फायदेमंद है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत लाभ
वित्तीय सहायता – कारीगरों को काम में सुधार लाने के लिए ₹15,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए भी सहायता दी जाएगी।
आधुनिक उपकरणों का वितरण – कारीगरों को उनके काम में उपयोगी आधुनिक उपकरण प्रदान किए जाएंगे।
बाजार से जुड़ाव – कारीगरों को विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उनके उत्पादों को बेचने का मौका मिलेगा।
कौशल प्रशिक्षण – आवेदनकर्ताओं को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने काम को और बेहतर बना सकें।
उधारी योजना – कारीगरों को कम ब्याज दर पर कर्ज़ भी मिल सकता है, जिससे वे अपने काम के लिए नए उपकरण खरीद सकें या अपने काम का विस्तार कर सकें।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में आवेदन कैसे करें
ऑनलाइन आवेदन –
1. प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत आवेदन करने के लिए आप आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
2. आवेदन करने के लिए आपको अपना नाम, पता, कार्य अनुभव, कौशल, और बैंक विवरण जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भरने होंगे।
3. पोर्टल का लिंक सरकार द्वारा जारी किया जाएगा, और इसमें आपको अपना विवरण दर्ज करना होगा।
ऑफलाइन आवेदन –
इसके अतिरिक्त, आप नजदीकी सरकारी कार्यालय या प्रवर्तन संस्थान में जाकर भी आवेदन कर सकते हैं। वहाँ आपको आवेदन पत्र प्राप्त होगा और आप उसे भरकर संबंधित कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया:
1. पोर्टल पर जाकर आवेदन के लिए रजिस्ट्रेशन करें।
2. आवेदन पत्र भरें और आवश्यक दस्तावेज़ जैसे पहचान पत्र, पता प्रमाण, कार्य अनुभव प्रमाण पत्र आदि अपलोड करें।
3. यदि आपके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है तो आप स्थानीय पंचायत या जिला कार्यालय में जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।
दस्तावेज़:
पहचान प्रमाण (आधार कार्ड, वोटर कार्ड आदि)
पता प्रमाण (राशन कार्ड, बिजली बिल आदि)
कार्य अनुभव प्रमाण पत्र
बैंकों का खाता विवरण (यदि किसी प्रकार की वित्तीय सहायता की आवश्यकता हो)
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य
1. कारीगरों को बेहतर उपकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद प्रदान करके उनके जीवन स्तर को सुधारना।
2. कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
3. भारतीय पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देना और देश के विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक धरोहर को सहेजना।